‪बीज‬ से ‪फल‬ तक का ‪संघर्षपूर्ण‬ सफ़र।

YUVA KRANTI

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फल आसमान‬ से नहीं टपकते। एक फल की शुरुआत एक #बीज को मिट्टी‬ में दबाने से होती है। पहले उस बीज को मिट्टी के अंदर ही संघर्ष करना पड़ता है और जब उसका वोसंघर्ष‬ जीत‬ में बदल जाता है तो एक नन्हा सा पौधा‬ हमे दिखाई देता है। फिर बाहर उस नन्हे से पेड़ की देखभाल प्रकृति और मनुष्य करते हैं जिसके बाद वो बड़ा होने लगता है। उसे पेड़ काटने वाले मनुष्यों से भी बचाना पड़ता है और उन जानवरों से भी जो बाहर घूमते रहते हैं। कुछ भी उस पेड़ से लेने से पहले उस पेड़ को देखभाल‬ के रूप में बहुत कुछ देना पड़ता है। कुछ साल बाद वो पेड़ सबसे पहले छाया‬ देता है और फिर छाया के बाद वो फल देने लगता है। पेड़ पर फल आने के बाद उन की पकने‬ तक फिर देखभाल करनी पड़ती है और फिर जा के मनुष्य को वो फल नसीब होते हैं। इसी पौधे के जीवन की तरह हम और हमारा संगठन युवा‬ क्रांति‬ है। हम अभी बहुत संघर्ष के बाद उस मिट्टी के अंदर होने वाली लड़ाई को जीत के एक नन्हे से पौधे का आकार‬ ले पाये हैं। हमे यहाँ से बहुत सा संघर्ष करके इस संगठन‬ रूपी पौधे को बड़ा करना है और साथ में ही धैर्य‬ के साथ इस पेड़ से फलों का ‪ इंतज़ार‬ भी करना है। मुझे पूरा विश्वास है कि एक दिन ये युवा क्रांति का पेड़ बड़ा हो के पूरी दुनिया को अमन‬ और शांति‬ का फल देगा, मुझे ये भीविश्वास‬ है कि ये ही पेड़ एक दिन बड़ा हो के ‪‎साम्राज्यवाद‬ की तपिश‬ से हमारे‪ ‎देशवासियों‬ को अपने ‪‎पत्तों‬ की छाया के द्वारा बचाएगा। एक इंसान या संगठन को दुनिया जब ही जानने लगती है जब वो ‪ सफल‬ हो चुका होता है, उसके सफल होने से पहले वाले संघर्ष और कड़ी तपस्या‬ को कोई न तो जनता और न ही जानने की कोई कोशिश करता। लेकिन जितना कड़ा #संघर्ष और तपस्या हम करेंगे, उतना ही हम सफल होंगे और उतना ही नाम हमारा ‪ चमकेगा‬
अंत में ये ही कहना चाहूँगा कि पूरा  दम‬ लगा के इस व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष कीजिए और अपने आप को धैर्य के साथ उस बड़ी लड़ाई के लिए  तैयार कीजिए।

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