Indigenous Indian Nationalism has no relation with Religious Extremism

“हिंदुस्तान” गांधी का मुल्क है, नेता जी सुभाष चंद्र बोस का मुल्क है, भगत सिंह का मुल्क है, खान अब्दुल गफार खान का मुल्क है, बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर का मुल्क है, अशफ़ाक़ उल्लाह खान का मुल्क है, रामप्रसाद बिस्मिल का मुल्क है। इसलिए यहाँ राष्ट्रवाद भी इन्हीं महान नेताओं के आदर्शों और विचारों पर आगे बढ़ेगा। लेकिन हमारा दुर्भाग्य ये है कि जो लोग भारत की आज़ादी के संघर्ष में कहीं दिखते नही थे वो आज देशभक्ति और राष्ट्रवाद के सर्टिफिकेट बांटते घूम रहे हैं। अब समय आ गया है की ये ऐलान कर दिया जाये कि असली “देशज भारतीय राष्ट्रवाद” गांधी, बोस, भगत सिंह, बिस्मिल, अशफ़ाक़ उल्लाह खान, बाबासाहेब आंबेडकर और खान अब्दुल गफार खान के आदर्शों व् विचारों से मिल के बना है, किसी कट्टरवादी या विदेशी सोच व् आदर्शों से नहीं।
साल की इस बड़ी कॉन्फ्रेंस का आयोजन 17 मार्च को कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में किया जा रहा है और आप सभी इसमें आमंत्रित हैं।

Leave a Comment