पूर्वी यूक्रेन में जारी युद्ध का सच

 

 

पिछले 3 साल से यूक्रेन में युद्ध चल रहा है। एक तरफ नाटो समर्थित पीटर पोर्शेनको की सरकार है तो दूसरी तरफ दोनेत्स्क और लुहानस्क पीपल रिपब्लिक की सेनाएं। इस युद्ध में अब तक हज़ारों बेगुनाह लोग मारे जा चुके हैं और लड़ाई अब भी थमने का नाम नहीं ले रही है।

पश्चिमी और कॉर्पोरेट मीडिया द्वारा सिर्फ एक पहलू दिखाया जा रहा है जो पश्चिमी देश दिखाना चाहते हैं। नाटो समर्थित राष्ट्रपति पीटर पोर्शेनको द्वारा पूर्वी यूक्रेन में लोगों का नरसंहार किया जा रहा है लेकिन उस पर संयुक्त राष्ट्र भी चुप है, मानवाधिकार संगठन भी और मीडिया भी। इस लेख के जरिये हम आपको इस युद्ध की सच्चाई से रूबरू कराना चाहते हैं। हम आपको बताना चाहते हैं कि किस तरीके से ओडेसा में सैंकड़ों लोगों को नाटो समर्थित यूक्रेन की सरकार ने जिंदा जला दिया।

इस युद्ध की शुरुआत होती है 2014 में जब सीआईए और नाटो देशों की इंटेलिजेंस एजेंसियों की मदद से विपक्ष के कुछ लोगों ने लोकतांत्रिक रूप से चुने गए राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच का तख्तापलट दिया। विक्टर यानुकोविच यूक्रेन को यूरोपियन यूनियन और नाटो का हिस्सा नहीं बनाना चाहते थे और रूस व नाटो के बीच चल रहे शीत युद्ध में वो न्यूट्रल रहना चाहते थे, इसी वजह से उनकी सरकार का तख्तापलट दिया गया। पूर्वी यूक्रेन में लगभग 80 प्रतिशत रूसी मूल के लोग रहते हैं जो रशियन भाषा बोलते हैं। विक्टर यानुकोविच का तख्तापलट करने के बाद यूक्रेन में नई बनी पश्चिम समर्थित सरकार ने यूरोपियन यूनियन और नाटो की तरफ कदम बढ़ाने शुरू कर दिये। पूर्वी यूक्रेन के लोगों द्वारा नई सरकार की इन नीतियों का विरोध किया गया और बड़े बड़े प्रदर्शन किए गए। क्रीमिया के लोगों ने रेफरेंडम करवा के रूस में जुड़ने का फैसला किया।

नई सरकार के नाज़ी समर्थकों और नाटो समर्थित आज़ोव बटालियन व नेशनल गार्ड्स के कट्टरपंथियों ने हथियारों के दम पर इन प्रदर्शनों को कुचलने की कोशिश की और ओडेसा जैसे अनेक नरसंहारों को अंजाम दिया जहां पर सैंकड़ों लोगों को ज़िंदा जला दिया गया। ओडेसा में नाटो समर्थित आज़ोव बटालियन ने एक बिल्डिंग के बाहर आने के सभी दरवाज़े बन्द करके उसमें आग लगा दी। उस बिल्डिंग पर प्रदर्शनकारियों ने क़ब्जा कर रखा था। इस नरसंहार में 272 लोगों को ज़िंदा जला दिया गया।

इसके बाद पूर्वी यूक्रेन के लोगों ने हथियारबंद विद्रोह शुरू किया और नाटो समर्थित यूक्रेन की सेना को खदेड़ दिया। पूर्वी यूक्रेन के लोगों ने दो नए आजाद मुल्क बनाने की बनाने की घोषणा की जिनके नाम रखे गए दोनेत्स्क पीपल रिपब्लिक और लुहानस्क पीपल रिपब्लिक। नए बने इन दोनों देशों पर यूक्रेन की सेना ने हमला कर दिया। रूस की सेना ने इन दोनों नए देशों की सेनाओं को ट्रेनिंग दी और लोजिस्टिक सपोर्ट भी मुहैया करवाया। रूसी सेना की मदद से लुहानस्क और दोनेत्स्क की सेनाओं ने यूक्रेनी सेना को पूर्वी यूक्रेन से खदेड़ कर अपने आपको आजाद राष्ट्र घोषित कर दिया। यूक्रेनी सेना की हालत बहुत पतली थी और दोनेत्स्क व लुहानस्क की सेनाएं तेजी से आगे बढ़ रही थी। पीटर पोर्शेनको की निश्चित हार को देखते हुए यूक्रेन की सरकार और नाटो बातचीत के लिए तैयार हो गए और सितम्बर 2014 में बेलारूस के मिंस्क में युद्ध विराम के समझौते पर हस्ताक्षर हो गए। इस युद्ध विराम के समय का इस्तेमाल यूक्रेन ने नाटो की मदद से अपनी सेना को मजबूत करने के लिए किया। इसके कुछ दिन बाद ही यूक्रेन की तरफ से युद्ध विराम का उल्लंघन होने लगा जिसके जवाब में दोनेत्स्क और लुहानस्क की सेनाओं ने भी जवाबी कार्यवाही की।

अब तक इस युद्ध में 10,000 से भी अधिक लोग मारे जा चुके हैं। यूक्रेन ने पूर्व के क्षेत्रों पर प्रतिबंध लगा रखा है और बिजली की लाइन भी कभी कभी काट दी जाती हैं। खाने की सामग्री भी पूर्वी यूक्रेन में नहीं जाने दी जाती है। पूर्वी यूक्रेन के लोगों की खाने की पूर्ति समय समय पर रूस द्वारा राहत सामग्री भेज कर की जाती है। अब लुहानस्क और दोनेत्स्क में यूक्रेन की करेंसी का इस्तेमाल नहीं किया जाता है बल्कि रूसी करेंसी “रुबेल” का इस्तेमाल किया जाता है। पूर्वी यूक्रेन के लोगों ने अपनी मेहनत से अपने शहरों को दोबारा से संवारा है और अपनी ज़िंदगी को वापस से पटरी पर लाएं हैं। नाटो समर्थित युद्धों ने हज़ारों जिंदगियों को निगला है, अब वक्त आ गया है जब पूरा विश्व एकजुट हो कर नाटो समर्थित युद्धों का विरोध करे और विश्व शांति की तरफ कदम बढ़ाए।

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